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पीलीभीत में मनरेगा योजना के तहत हो रही है बालमजदूरी

पूरे देशभर में 12 जून को एंटी चाइल्ड लेबर डे यानि बालश्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। बाल मजदूरी के खिलाफ भाषण औऱ जागरूगता के लिए रैलियां निकाली जाती है। लेकिन असल जिंदगी में इसे लागू नहीं करते हैं। लगभग 17 सालों से इस दिवस को मनाया जाता है और फिर वही बाल मजदूरी शुरू हो जाती है। बच्चों से मजदूरी करवाई जाती है।

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत तालाब बनाने के लिए खुदाई का काम किया जा रहा है। जहां मजदूरों में 10 से 15 साल के मासूम बच्चों से काम करवाया जा रहा है। मिट्टी के ढेर को उठाते,फावड़े चलाते हैं। ये मजदूरी किसी बंद कमरे में नहीं खुलेआम मैदान में सबके सामने हो रही है। फिर भी कोई कुछ नहीं बोलता है। इस मामले में विधायक को कोई जानकारी नहीं हैं और ना ही अधिकारियों को कुछ लेना देना है। बालमजदूरी अपराध है लेकिन किसी को भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। और बालमजदूरी जारी है।

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव डॉ अनूप चंद्र पाण्डेय ने बालमजदूरी पर रोक लगाने के लिए प्रदेश के सभी मंडलायुक्त और जिला अधिकारियों को आदेश दिया था। कि बाल मजदूरी को रोकने के लिए हर तिमाही में कम से कम एक सप्ताह का विशेष अभियान संचालित करें। साथ ही पत्र में कहा कि 10 जून से लेकर 25 जून तक बाल श्रमिकों के संबंध में विशेष अभियान चलाकर कार्यवाही करें।

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