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मोमबत्ती में पढ़ने को मजबूर हुए बच्चे

कानपुर देहात के रसूलाबाद तहसील क्षेत्र का भौथरी गांव अभी तक रोशनी नहीं पहुंची हैं। लोग लालटेन और मोमबत्ती की काखिल में अपनी भविष्य बना रहे हैं। सरकार की तरफ से किसी भी प्रकार से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

21वीं सदी में रहने के बाद भौथरी गांव में लोगों के घरों में बिजली के कनेक्शन तक नहीं हैं। बच्चे मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पढ़ने वाले बच्चों की गिनती उंगलियों पर हो सकती है। बिजली ना होने से बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर पड़ता है। ज्यादातर आबादी अनपढ़ ही रह गयी है। सभी अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। गांव में 1 वर्ष पहले ही बिजली का कार्य शुरू हुआ लेकिन 1 वर्ष से अभी तक गांव में विद्युतीकरण का कोई कार्य नहीं हुआ। गांव में जगह-जगह खंभे पड़े हैं और ट्रांसफार्मर मुंह चिढ़ा रहा है।

 

गांव के लोग भीषण गर्मी में परेशान है। ऐसे में बिजली से उम्मीद होती है कि बिजली होगी तो पंखा चलेगा और गर्मी से राहत मिलेगी लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं है। विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव वोट लेने के लिए गांव जनप्रतिनिधि आते हैं। मतदान होने के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि वापस नजर नहीं आता है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी है। गाँव के ग्रामीणों ने बताया कि समस्या को लेकर कई बार अफसरों से भी शिकायत दर्ज कराई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।

गावं के लोगों का कहना है कि पैसा हो तो मोमबत्ती जल जाती है। क्योंकि लालटेन तक जलाने के लिए कैरोसीन नहीं मिलता है। आजादी के बाद भी रोशनी नसीब नहीं हुई है। पहले सरकार से उम्मीद थी,लेकिन अब वो भी नहीं रही। वहीं मुख्य विकास अधिकारी जोगिंदर सिंह ने बताया कि मुझे इस प्रकार की कोई जानकारी नही है अगर ऐसा है तो 2 दिन में व्यवस्था ठीक कराकर बिजली शुरू करा दी जायेगी।

 

 

 

 

 

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